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मोदी सरकार के सबसे बड़े मंत्रिमंडल में किसी मुस्लिम चेहरे को जगह क्यों नहीं मिली........

नौ जून को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए पदभार संभाल लिया.
नई दिल्ली /( सुनील शर्मा)नौ जून को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए पदभार संभाल लिया.। उनके अलावा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के लिए भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के 71 लोगों को शपथ दिलाई गई.

पिछले दो कार्यकाल की तुलना में देखें तो नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) की सरकार की ये अब तक की सबसे बड़ी मंत्रिपरिषद है.

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद के लिए एक भी मुस्लिम सांसद को शपथ नहीं दिलाई गई.। 
इतना ही नहीं लोकसभा में एनडीए के 293 सांसदों में एक भी मुस्लिम, सिख या ईसाई नहीं है.राजनीतिक विशेषज्ञों और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि देश में मुसलमानों की घटती राजनीतिक भागीदारी का ये चलन चिंताजनक है.

दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी ऐसे दावों को ख़ारिज करती है.

पार्टी का कहना है कि वो धर्म या जाति के आधार पर टिकट नहीं बांटती और उसके निर्वाचित जनप्रतिनिधि सभी के फ़ायदे के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो.। 

मंत्रिमंडल की संरचना

अठारहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को कुल 240 सीटों पर जीत मिली. सहयोगी दलों के साथ लोकसभा में उसके पास 293 सीटें हैं.

आठ जून को प्रधानमंत्री समेत 72 लोगों ने मंत्रिपरिषद की शपथ ली. इनमें 61 बीजेपी से हैं और 11 एनडीए के घटक दलों से हैं.

साल 2014 के बाद से एनडीए के मंत्रियों की ये सबसे बड़ी संख्या है. साल 2014 में कुल 46 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी जिनमें 24 कैबिनेट रैंक के मिनिस्टर थे.

साल 2019 में मंत्रिपरिषद के मंत्रियों की संख्या बढ़कर 57 हो गई थी.

हालांकि इस बार ये कहा जा रहा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि नई सरकार के शपथ ग्रहण में किसी भी मुस्लिम चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है.

बीजेपी के पहले दो कार्यकाल में एक मुस्लिम व्यक्ति को अल्पसंख्यक मामलों का केंद्रीय मंत्री बनाया गया था.

इस साल किरेन रिजिजू जो एक बौद्ध हैं, उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का केंद्रीय मंत्री बनाया गया है. किरेन रिजिजू के साथ जॉर्ज कूरियन को उनके विभाग में जूनियर मंत्री के तौर पर राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है. जॉर्ज कूरियन ईसाई हैं.

साल 2014 में डॉक्टर नजमा हेपतुल्ला को अल्पसंख्यक मामलों का केंद्रीय मंत्री बनाया गया था. राज्यसभा की पूर्व सांसद नेजमा हेपतुल्ला फिलहाल मणिपुर की राज्यपाल हैं.

साल 2019 में पीएम मोदी ने पार्टी के राज्यसभा सांसद मुख़्तार अब्बास नक़वी को अल्पसंख्यक मामलों के विभाग की जिम्मेदारी दी थी हालांकि तीन साल बाद 2022 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनके बाद स्मृति इरानी को अल्पसंख्यक मामलों के विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया.

इस लिहाज से देखें तो साल 2024 के चुनाव से काफी पहले 2022 से ही बीजेपी सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है और न ही संसद के किसी सदन में कोई मुस्लिम सांसद.

इसके अलावा एक तथ्य ये भी है कि देश भर की अलग-अलग विधानसभाओं में बीजेपी के पास एक हज़ार से अधिक विधायक हैं लेकिन उसमें केवल एक मुस्लिम एमएलए है.

साल 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की आबादी में मुसलमानों की संख्या 17.22 करोड़ है और वे कुल जनसंख्या में उनकी भागीदारी 14.2 फ़ीसदी है.

अठारहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में 24 मुस्लिम सांसद निर्वाचित हुए हैं जिनमें 21 विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दलों से हैं.। 


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