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450 सालों से यहां राजा के रूप में विराजते हैं राम, अयोध्‍या में करने जाते हैं केवल रात्रि विश्राम

450 सालों से यहां राजा के रूप में विराजते हैं राम, अयोध्‍या में करने जाते हैं केवल रात्रि विश्राम
ओरछा की रानी अयोध्‍या से 1570 में भगवान राम का विग्रह लेकर आईं और अपने महल में स्‍थापित किया। स्‍थानीय लोगों का विश्‍वास है कि ओरछा के राजा भगवान राम हैं। वह दिन में यहां रहते हैं और अयोध्‍या केवल रात्रि विश्राम के लिए जाया करते हैं।
हाइलाइट्स
ओरछा में देश का इकलौता मंदिर है जहां राम राज के रूप में विराजमान हैं
450 साल पुराने इस मंदिर की स्‍थापना की कहानी बड़ी रोचक और अद्भुत है
बताया जाता है कि यहां स्‍थापित मूर्ति अयोध्‍या की सरयू नदी से लाई गई है
ओरछा/( सुनील शर्मा) अयोध्‍या में 22 जनवरी को भव्‍य राममंदिर में भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्‍ठा की गई। यहां स्‍थापित भगवान राम बाल स्‍वरूप में हैं। वे बालक राम हैं। लेकिन उत्‍तर प्रदेश-मध्‍य प्रदेश की सीमा पर स्थित छोटे से कस्‍बे ओरछा में भगवान राम राज के रूप में विराजमान हैं। यूपी के झांसी से सटा ओरछा मध्‍य प्रदेश की सीमा में आता है। जिला है निवाड़ी। अयोध्‍या में राम मंदिर को ध्‍वस्‍त करके बाबर के सिपहसालार मीर बांकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। कहा जाता है कि ओरछा की रानी को इस घटना के करीब 50 बाद सरयू नदी से भगवान राम की एक मूर्ति मिली। उसे वह यहां लाईं और अपने महल में स्‍थापित किया। तब से भगवान राम यहां के राजा हैं। उन्‍हें रोज गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है।
एक जमाने में बुंदेलखंड के जंगलों में छिपा यह छोटा सा शहर कैसे दूसरी राम नगरी बना यह अपने आप में एक दिलचस्‍प कहानी है। ओरछा के बुंदेला शासकों का दावा है कि वे भगवान राम के कुल के हैं, रघुवंशी हैं। बुंदेला खुद को भगवान राम के बेटे लव का वंशज बताते हैं। 
ऐसे कहलाए बुंदेला
उनके बुंदेला कहलाए जाने के पीछे भी एक अनोखी कथा है। 11 वीं सदी में इनके एक पूर्वज थे हेम करन। उन्‍होंने देवी विंध्‍यवासिनी की घोर साधना की। उस साधना के फलस्‍वरूप देवी प्रसन्‍न हुईं और उन्‍हें पंचम विंध्‍येला की उपाधि दी। समय के साथ विंध्‍येला शब्‍द बिगड़ कर बुंदेला हो गया और उनका राज्‍य बुंदेलखंड कहलाया।

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