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Ram Mandir: 'सरयू नदी में तैर रही थीं साधु-सांतों की लाशें' राम मंदिर संघर्ष की कहानी कार सेवकों की जुबानी....

कार सेवकों की सनातन धर्म के प्रति सच्ची श्रद्दा आस्था त्याग, बलिदान का परिणाम हैं कि आज 22 जनवरी 2024 में हमारे आराध्य प्रभु श्री राम लला सरकार अपने नये  दिव्य महल में विराजमान हो रहे हैं। 
आयोध्या /दुर्ग/( सुनील शर्मा)  दुर्ग के शिक्षक नगर निवासी शैलेन्द्र शर्मा  व शिक्षक नगर निवासी व दुर्ग शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एव पूर्व एलडरमेन  स्व. सुरेन्द्र मिश्रा आयोध्या नया घाट निवासी  संस्कृत के आचार्य स्व रघुनाथ पाण्डेय  भी हैं, जो 1990 और 1992 हर पल के गवाह रहे, अब 22 जनवरी को दिवाली की तरह अपने परिवार के साथ मनाने की तैयारी कर रहे हैं । शैलेन्द्र शर्मा  व स्व. सुरेन्द्र मिश्रा तथा स्व रघुनाथ पाण्डे   के परिवार की दास्तां उस वक्त बने हालात और कठिन संघर्ष के बाद आज के सुखद परिणाम को बताती है। उनके सनातन धर्म के प्रति  सच्ची श्रद्दा आस्था त्याग, बलिदान का  परिणाम हैं कि आज 22 जनवरी 2024 में हमारे आराध्य प्रभु श्री राम लला सरकार अपने नये महल में विराजमान हो रहे हैं। 
ये हैं आयोध्या नया घाट निवासी  संस्कृत के आचार्य   स्व रघुनाथ पाण्डेय, दुर्ग शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एव पूर्व एलडरमेन स्व. सुरेन्द्र मिश्रा, दुर्ग के शिक्षक नगर निवासी शैलेन्द्र शर्मा  निवासी हैं
 
बता दे कि  22 जनवरी, वो तारीख जब देश में राम मंदिर (Ram Mandir) का लक्ष्य साकार हो रहा है, लेकिन इस भव्य मंदिर के साथ एक लंबे संघर्ष की भी कहानी है। इस लड़ाई को बड़े पैमाने पर  हजारों की संख्या में मौजुद कार सेवकों ने लड़ा, उन्हीं में से दुर्ग के शैलेन्द्र शर्मा व व शिक्षक नगर निवासी व दुर्ग शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष स्व. सुरेन्द्र मिश्रा आयोध्या नया घाट निवासी स्व रघुनाथ पाण्डे भी हैं, जो 1990   में मुलायम सिंह के सरकार  व 1992 मे कल्याण सिंह सरकार के समय भी हैं, जो 1990 और 1992 हर पल के गवाह रहे, अब 22 जनवरी 2024 को दिवाली की तरह अपने परिवार के साथ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। दिलीप शुक्ला की दास्तां उस वक्त बने हालात और कठिन संघर्ष के बाद आज के सुखद परिणाम को बताती है।

शैलेन्द्र शर्मा बताते हैं, "जब 1992 में अविभाजीत मध्य प्रदेश के दुर्ग जिले के शिक्षक नगर से कार सेवा के लिए गया, लेकिन पूरे संघर्ष के बाद भी  आयोध्या  तक पहुच गए लेकिन कार सेवा के लिए आए हजारों की संख्या में राम भक्त मंदिर तक नहीं पहुंच पाए ।  बाबरी  विध्ववंश के समय उन्होंने  अपनी अपनी श्रद्धा के अनुरूप सेवाए दी  । इनके भी  प्रभु श्री राम के प्रति  आस्था,त्याग और बलिदान को भुलाया नहीँ जा सकता। वहीं 1990 मे हुए कार सेवा के समय झांसी और इटावा के बीच नदी के पुल पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर, जनरेटर के जरिए उसमें करंट छोड़ा दिया। उसके बाद हम सभी कार सेवकों ने जनरेटर को बंद किया, तो पुलिस ने हम पर लाठियां बरसाईं। हमारे लिए जो लोग खाने और बैठने की व्यवस्था कर रहे थे, उनकी मोटरसाइकिलों में आग लगा दी। हम पर आंसू गैस के गोले फेंके।

उन्होंने आगे बताया कि स्थिति ऐसी थी कि पुलिस हम पर गोला फेंकती और हम उसे उठा कर नदी में फेंकते रहे। उसके बाद हवाई फायरिंग की गई, भगदड़ मच गई उसके बाद सभी कार सेवकों को बसों में भरकर कानपुर में कृषि उपजमंडी में अस्थाई जेल बनाकर कैद कर दिया गया।

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