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Ram Mandir ayodhya: आज महल में प्रवेश करेंगे राजाधिराज राम, शयन आरती के बाद करेंगे विश्राम

 रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के आचार्य अरुण कांत दीक्षित ने बताया कि रामलला के अचल विग्रह के साथ रजत विग्रह और विराजमान रामलला का एक साथ रविवार रात शैयाधिवास होगा।। 
आयोध्या /( सुनील शर्मा) रामलला के नव्य-भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के अंतिम चरण में विराजमान रामलला रविवार की शाम को राजाधिराज के रूप में प्रवेश करेंगे। इसके चलते आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन रोक दिया गया है जो अब 22 जनवरी के बाद शुरू होगा। सूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विराजमान रामलला को नए मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचाएंगे। मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में रामलला की शनिवार की रात आखिरी थी। इसके पहले आम दिनों की तरह रामलला के पूजन-अर्चन का क्रम चलता रहा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के आचार्य अरुण कांत दीक्षित ने बताया कि रामलला के अचल विग्रह के साथ रजत विग्रह और विराजमान रामलला का एक साथ रविवार रात शैयाधिवास होगा। इसके पहले निर्दिष्ट विधि से पूजन कर शयन आरती के साथ भगवान को विश्र दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिवास का शाब्दिक अर्थ है V 'रहना'। एक प्रकार से यह साप्ताहिक अनुष्ठान से उत्पन्न श्रीविग्रह क थकान मिटाने की भी प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि शैयाधिवास के बाद सोवार को 84 सेकेंड के निर्धारित मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान का नेत्रोन्मिलन करेंगे।। 
विष्णु स्वरूप मानकर चार बार परिक्रमाः
 इसके पहले शनिवार को मंदिर में 81 रजत कलशों के पवित्र जल का छिड़काव कर शुद्धीकरण किया गया। भगवान के रजत विग्रह की पालकी यात्रा निकाली गई। सबसे पहले यज्ञ मंडप में पूजन के बाद भगवान के उत्सव विग्रह स्वरूप को पालकी में विराजित कर यज्ञ मंडप की च अगला परिक्रमा कराई गई। फिर पालकी को मंदिर की परिधि में चार बार परिभ्रमण कराया गया। यज्ञाचार्य अरुणकांत दीक्षित ने बताया कि शास्त्रत्तें में भगवान विष्णु की चार परिक्रमा का विधान है। रामलला को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है, इसके चलते उनकी भी चार परिक्रमा की गई।
मंत्रोच्चारण और राम नाम जप के साथ परिक्रमा: परिक्रमा के दौरान वैदिक आचार्य गण यजुर्वेद के मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे जबकि अन्य श्रद्धालु राम नाम का जप कर रहे थे। प्रमुख यजमान डॉ. अनिल मिश्र, उनकी पत्नी उषा मिश्रा, अशोक सिंहल फाउंडेशन के संस्थापक महेश चंद्र भागका व विहिप के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार अतिरिक्त यजमान थे।

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