श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के सभी जजों को भी निमंत्रण भेजा था, जिन्होंने अयोध्या मामले में फ़ैसला सुनाया था. इसमें मौजूदा मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे. हालांकि चंद्रचूड़ इस आयोजन में शामिल नहीं हुए.
अयोध्या मामले में फ़ैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चंद्रचूड़ भी थे.।
और कौन-कौन शामिल हुए?
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस केहर ने 2017 में अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए व्यक्तिगत रूप से मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. केहर भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.जस्टिस केहर के अलावा जस्टिस वीएन खरे, एनवी रमन्ना और यू यू ललित भी समारोह में शामिल हुए. ये तीनों भी भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं.
एक समाचार पत्र समुह ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के क़रीब एक दर्जन से ज़्यादा पूर्व जज भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शरीक हुए., इस लिस्ट में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के प्रमुख जस्टिस अशोक भूषण का नाम भी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आदर्श गोयल भी इस समारोह में शामिल हुए. जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब आदर्श गोयल ने बतौर वकील यूपी सरकार की तरफ़ से केस भी लड़ा था.
इनके अलावा जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम, अनिल दवे, विनीत सरन, ज्ञान सुधा मिश्रा भी मौजूद थे.
2010 में अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था. इस फ़ैसले को सुनाने वाली बेंच में जस्टिस सुधीर अग्रवाल भी थे. वो भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.
हाईकोर्ट ने 2:1 के फ़ैसले के साथ विवादित 2.77 एकड़ ज़मीन को तीन हिस्सों में बांटने का फ़ैसला सुनाया था. फ़ैसले में ज़मीन को सुन्नी वक्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम मंदिर को दिए जाने की बात कही गई थी.
सिर्फ़ जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने हिंदू पक्ष के हक में फ़ैसला सुनाया था .भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश की थी. वैद्यनाथन भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.।
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