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प्राण प्रतिष्ठा समारोह: सुप्रीम कोर्ट के कितने पूर्व जज आए, मूर्ति को क्या नाम दिया गया - प्रेस रिव्यू

अयोध्या /( सुनील शर्मा) 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हज़ारों लोग शामिल हुए.कुछ लोग मंदिर परिसर में मौजूद थे और कुछ लोग लाइव प्रसारण देखकर इस आयोजन के साक्षी बने.मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई नामी हस्तियां भी शामिल हुईं.। फिर चाहे ये लोग साधु संत हों या फिर फिल्मी हस्तियां या बड़े उद्योगपति.इस मौक़े पर पीएम मोदी ने कहा, ''संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली. मैं आभार व्य​क्त करूंगा भारत की न्यायपालिका का, जिसने न्याय की लाज रख ली. न्याय के पर्याय प्रभु श्रीराम का मंदिर भी न्यायबद्ध तरीके से बना.''। 
समारोह में भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के अलावा सुप्रीम कोर्ट के एक दर्जन से ज़्यादा पूर्व न्यायाधीश भी शामिल हुए.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के सभी जजों को भी निमंत्रण भेजा था, जिन्होंने अयोध्या मामले में फ़ैसला सुनाया था. इसमें मौजूदा मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे. हालांकि चंद्रचूड़ इस आयोजन में शामिल नहीं हुए.

अयोध्या मामले में फ़ैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चंद्रचूड़ भी थे.। 

और कौन-कौन शामिल हुए?

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस केहर ने 2017 में अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए व्यक्तिगत रूप से मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. केहर भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.जस्टिस केहर के अलावा जस्टिस वीएन खरे, एनवी रमन्ना और यू यू ललित भी समारोह में शामिल हुए. ये तीनों भी भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं.

एक समाचार पत्र समुह ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के क़रीब एक दर्जन से ज़्यादा पूर्व जज भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शरीक हुए., इस लिस्ट में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के प्रमुख जस्टिस अशोक भूषण का नाम भी शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आदर्श गोयल भी इस समारोह में शामिल हुए. जब 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, तब आदर्श गोयल ने बतौर वकील यूपी सरकार की तरफ़ से केस भी लड़ा था.

इनके अलावा जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम, अनिल दवे, विनीत सरन, ज्ञान सुधा मिश्रा भी मौजूद थे.

2010 में अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था. इस फ़ैसले को सुनाने वाली बेंच में जस्टिस सुधीर अग्रवाल भी थे. वो भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.

हाईकोर्ट ने 2:1 के फ़ैसले के साथ विवादित 2.77 एकड़ ज़मीन को तीन हिस्सों में बांटने का फ़ैसला सुनाया था. फ़ैसले में ज़मीन को सुन्नी वक्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम मंदिर को दिए जाने की बात कही गई थी.

सिर्फ़ जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने हिंदू पक्ष के हक में फ़ैसला सुनाया था .भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश की थी. वैद्यनाथन भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए.। 

राम लला की मूर्ति को क्या नाम दिया गया?। 

राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए जब पीएम मोदी गर्भ गृह की ओर जा रहे थे, तो उनके हाथ में चांदी का छत्र था.

51 इंच की राम लला की मूर्ति को मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है.

एक समाचार पत्र समुह की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस मूर्ति को बालक राम नाम दिया गया है.

राम लला की पुरानी छोटी मूर्ति को इसी गर्भ गृह में रखा गया है. गर्भ गृह में जब प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तब पीएम मोदी के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और जन्मभूमि ट्रस्ट प्रमुख नृत्यगोपाल दास मौजूद थे.

इनके अलावा मुख्य पूजा के वक़्त प्रधान यजमान अनिल मिश्रा, ऊषा मिश्रा, ट्रस्ट से जुड़े गोविंद देव गिरी महाराज, कामेश्वर चौपाल, स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज मौजूद थे. इनके अलावा प्राण प्रतिष्ठा की तारीख़ और वक़्त चुनने वाले वैदिक स्कॉलर ज्ञानेश्वर शास्त्री भी गर्भगृह में मौजूद थे.

एक समाचार पत्र समुह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि प्राण प्रतिष्ठा आचार्य सुनील शास्त्री दीक्षित और उनके पिता आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित की मौजूदगी में हुई.

समारोह में जो पारंपरिक संगीत सुनाई दे रहा था, वो 18 राज्यों से आए 50 वाद्य यंत्रों से बजाया जा रहा था.

राम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से राम लला की मूर्ति पर जो आभूषण हैं, उनकी भी जानकारी दी गई है.

ट्रस्ट की ओर से बताया गया है कि राम लला की मूर्ति को पहनाए गए आभूषणों का निर्माण रामायण, श्रीमद्वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरिमानस और आलवन्दार स्त्रोत के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्रसम्मत शोभा के अनुरूप शोध और अध्ययन के बाद किया गया है.

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