मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और राजस्थान में हर पांच साल में जनता सरकार बदल देती है। कांग्रेस को तीनों ही राज्यों में बुरी हार मिली है, जबकि पार्टी तेलंगाना में शानदार जीत दर्ज करने में कामयाब रही। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार रहते हुए भी कांग्रेस चुनाव क्यों हार गई। कांग्रेस की हार के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन हार के कारणों में जो सबसे आम बात है वो यह कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान के राज्य नेतृत्व में भारी गुटबंदी। छत्तीसगढ़ में जनता के प्रति कांग्रेस के मंत्रियों का व्यवहार भी भारी पड़ा है, जिसकी वजह से भूपेश सरकार के नवरत्न चुनाव हार गए।
छत्तीसगढ़ से कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीद थी
कांग्रेस को सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ जीतने की उम्मीद थी, लेकिन यहां भी पार्टी का प्रदर्शन काफी बुरा रहा। यहां बीजेपी ने 90 में से 54 सीटें जीतने में कामयाब रही। कांग्रेस को महज 35 सीटें ही मिली हैं। विधानसभा चुनाव से पहले 71 सीटें थी, अब आधे पर आ गई। 75 प्लस का दावा था, लेकिन दावों का दम जनता ने निकाल दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ियावाद को आगे बढ़ाने में सफल रहे। पांच साल तक उन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया, लेकिन उनके मंत्रियों और कांग्रेस के नेताओं के अहंकार ने पूरी नाव को डूबो दिया। अब हार के कारणों की समीक्षा करने की बातें हो रही, जनादेश स्वीकार करने की बातें हो रही है।
सीएम पद को लेकर सिंहदेव-बघेल में रही खींचतान
छत्तीसगढ़ में साल 2018 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ढाई-ढाई साल के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाने की सहमति बनी थी, लेकिन इसके उलट भूपेश बघेल लगातार पांच साल तक के लिए मुख्यमंत्री रहे। टीएस सिंहदेव और बघेल के बीच इसी बात को लेकर तनातनी रही और यह विवाद इस बार के चुनाव में भी देखने को मिला है। सरकार के कार्यकाल के आखिर में टीएस सिंहदेव को भले ही छत्तीसगढ़ का उप मुख्यमंत्री बना दिया गया, लेकिन वो कांग्रेस के चुनाव प्रचार में कम ही दिखाई दिए। इसके साथ ही टीएस सिंहदेव छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव हार गए हैं। जनता के बीच लोकप्रिय होने की वजह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं।
गुटबाजी भी भारी पडा, कांग्रेस की हार की वजह
कांग्रेस में ओबीसी के सबसे बड़े समाज साहू- कुरमी जाति वाद यादव,, निषाद, सेन, सहित अनेक समाज में अपने अपने जाति को विजय बनाने के लिए कांग्रेस ने इन समाज को साध नहीं पाए समाज के नेताओं में जमकर गुटबाजी रही। कांग्रेस सिर्फ किसान कर्जा माफ़ बिजली बिल हाफ इस पर फ़ोकस करता रहा। इसी बीच भाजपा की महतारी वंदन योजना महिलओ में जबर्दस्त समर्थन मिल चुका था। वहीं शराब सेवन करने वाले समुह में कांग्रेस के प्रति काफि आक्रोशित थे। इसके अलावा कांग्रेस के नेताओ में गुटबाजी भी हार की बडी वजह बनी।।
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