हाइलाइट्स
- महाकाल की नगरी से जुड़ा है मिथक
- कोई सीएम नहीं कर सकता रात्रि विश्राम
- आज उज्जैन में रुकेंगे मोहन यादव
- महाकाल की नगरी है उज्जैन
- क्या मोहन यादव का रुकना उचित है या अनुचित
- एम पी के सीएम पद पर हैं मोहन यादव
- क्या वे महाकाल की नगरी में नागरिक की हेसियत से रुकेनगें रात
उज्जैन:/( सुनील शर्मा) मध्यप्रदेश का एक जिला है उज्जैन। इसे महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। महाकाल को उज्जैन का राजाधिराजा माना जाता है। इस शहर के बारे में एक मिथक है कि यहां महाकाल के अलावा दूसरा कोई 'राजा' नहीं रुक सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को भी 'राजा' माना जाता है। मध्यप्रदेश के नए सीएम मोहन यादव भी उज्जैन के रहने वाले हैं। वह, उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। मध्यप्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि राज्य का कोई सीएम उज्जैन में रुकेगा।
ऐसा मिथक है कि अगर कोई दूसरा राजा उज्जैन में रात में विश्राम करता है तो उसकी मौत हो जाती है। महाकाल के अलावा केवल विक्रमादित्य ही ऐसे राजा थे जो उज्जैन में रात विश्राम किए हैं। इसके अलावा किसी राजा ने यहां रात नहीं बताई है। सिंहस्थ के समय मध्यप्रदेश के तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान तैयारियां का जायजा लेने उज्जैन जाते थे लेकिन कभी यहां रुके नहीं।
मोहन यादव 16 दिसंबर की रात उज्जैन में भी बिताएंगे।
मोहन यादव सीएम पद की शपथ लेने के बाद सबसे पहले महाकाल के मंदिर पहुंचे थे और फिर वापस भोपाल आ गए थे। महाकाल के मंदिर में उन्होंने माथा टेका था। सीएम के उज्जैन में रात्रि विश्राम को लेकर पंडित अरविंद तिवारी ने कहा कि, सीएम वहां राजा बनकर नहीं रुक सकते हैं वह केवल दास बनकर उज्जैन में रह सकते हैं। यही कारण है कि सीएम पद की शपथ लेने के बाद वे सबसे पहले उज्जैन गए थे और उन्होंने महाकाल के सामने खुद को दास के रुप में पेश किया था।
सिंधिया परिवार के सदस्य भी नहीं करते हैं रात्रि विश्राम
उज्जैन को ग्वालियर रियासत का हिस्सा माना जाता है। उज्जैन में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार आज से करीब 150 साल पहले सिंधिया राजवंश के महाराजा राणोजी सिंधिया ने करवाया था। उसके बाद से इस रियासत का कोई भी सदस्य उज्जैन में नहीं रुकता है। माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कभी भी उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं किया।
उज्जैन में अगर कोई राजा रात्रि विश्राम करता है तो वह काल का ग्रास बनता है।
""उज्जैन में अगर कोई राजा रात्रि विश्राम करता है तो वह काल का ग्रास बनता है। मोहन यादव उस स्थान में रुक सकते हैं जो उज्जैन नगर निगम की सीमा या फिर शिप्रा नदी के दूसरे किनारे में हो। महाकाल के अलावा यहां और कोई दूसरा राजा नहीं हो सकता है।""
पंडित अरविंद तिवारी
क्या है मिथक?
उज्जैन शहर से ये मिथक जुड़ा है कि किसी भी रियासत का राजा इस शहर में नहीं रुक सकता है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को राजा का दर्जा दिया जाता है। यहां अगर कोई राजा एक रात बिताता है या तो उसकी मौत हो जाती है या फिर उसकी सत्ता चली जाती है।
0 Comments