नई दिल्ली /( सुनील शर्मा) जहां कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी ने बहुमत हासिल किया वहीं मध्य प्रदेश में उसने अपनी पकड़ को और पुख्ता किया है. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को एक अख़बार में लेख लिखकर कहा है कि चार राज्यों में (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना) कांग्रेस का वोट शेयर 40 फ़ीसदी रहा है. ये लगभग उतना ही है जितना 2018 में था.।
उनका कहना है कि मध्य प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो बाकी दो हिंदी भाषी राज्यों (राजस्थान और छत्तीसगढ़) में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर में फर्क कम है, जिसे कोशिश की जाए तो भरा जा सकता है.पी. चिदंबरम मानते हैं कि फिलहाल हवा बीजेपी के पक्ष में है, लेकिन कुछ महीनों बाद होने वाले लोकसभा चुनावों तक इस फर्क को पाट पाना मुश्किल नहीं है.हालांकि वो कहते हैं कि इसके लिए ये समझना होगा कि अब चुनाव की प्रकृति बदल चुकी है और इसके लिए वक्त, ताकत और संसाधन झोंकने की ज़रूरत है.
यानी विधानसभा चुनावों का पैटर्न अगर लोकसभा चुनावों में भी दोहराया गया और तब कांग्रेस ने इसमें सुधार की कोशिश की तो हो सकता है कि अगले आम चुनावों में उसकी स्थिति बेहतर हो.
लेकिन सवाल ये है कि बीते चुनावों में देखा गया था कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मुद्दे और वोटिंग पैटर्न अलग होते हैं.
ऐसे में क्या वाकई कांग्रेस लोकसभा चुनावों में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन कर उभर पाएगी?
ख़ासकर तब जब बीते चुनावों में ऐसा नहीं देखा गया. और क्या वाकई दो से तीन महीनों के भीतर कांग्रेस के लिए इस फर्क को पाट पाना आसान है?
पी चिदंबरम ने मध्य प्रदेश में बीजेपी की जीत के कारण गिनाए हैं और कहा है कि ये हिंदुत्व की प्रयोगशाला है और यहां बीजेपी की पैठ गहरी है.
यहां बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस को संगठन के स्तर पर काफी मशक्कत करनी थी जो हो नहीं पाया और बीजेपी ने यहां केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को उतारकर बड़ा दांव खेला. बीजेपी को अपने निवेश का नतीजा भी मिला.
उन्होंने छत्तीसगढ़ के बारे में लिखा कि यहां के नतीजोंं ने उन्हें भी चौंका दिया. यहां कांग्रेस का वोट शेयर घटा और उसने आदिवासी बहुल सीटें खो दीं, जो बीजेपी के पक्ष में गया.
वहीं राजस्थान में एंटी इनकम्बेंसी ने काम किया और राजस्थान के लोगों ने एक बार फिर ‘केवल पांच साल के लिए सरकार‘ वाला पैटर्न दोहराया.
चुनाव आयोग के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटों में बीजेपी को 54 और कांग्रेस को 35 सीटों पर जीत मिली. बीते चुनावों के मुक़ाबले बीजेपी का प्रदर्शन यहां बेहतर रहा क्योंकि उसके वोट शेयर में भी 33.0 फ़ीसदी से 46.27 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हुई.
वहीं यहां कांग्रेस का वोट शेयर थोड़ा घटा. जहां 2018 में उसका वोट प्रतिशत 43.0 फ़ीसदी था, 2023 में 42.23 फ़ीसदी तक आ गया.
राजस्थान में बीजेपी को 199 में से 115 सीटें मिलीं. कांग्रेस, जो बीते चुनावों में 100 सीटें ला सकी थी, उसे 69 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा.
यहां भी बीजेपी के वोट शेयर में अच्छी बढ़त देखी जा सकती है (2018 में 38.77 फ़ीसदी से इस साल 41.69 फ़ीसदी), लेकिन कांग्रेस की बात करें तो ये बढ़त मामूली दिखती है (2018 में 39.30 फ़ीसदी से 2023 में 39.53 फ़ीसदी).
मध्य प्रदेश की स्थिति भी राजस्थान जैसी दिखती है. वोट शेयर के मामले में बीजेपी 2018 में 41.02 फ़ीसदी से बढ़कर 2023 में 48.55 फ़ीसदी तक पहुंची, वहीं कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली गिरावट (2018 में 40.89 फ़ीसदी से 2023 में 40.40 फ़ीसदी) देखने को मिली.
रही बात तेलंगाना की तो, वहां तेलंगाना राष्ट्र समिति से भारत राष्ट्र समिति बनी के. चंद्रशेखर राव की पार्टी, जो बीते चुनावों में कुल 119 में से 88 सीटों पर काबिज़ थी, मात्र 39 पर सिमट गई.
लेकिन अगर लोकसभा चुनावों की बात करें तो छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश की अधिकतर सीटों पर बीते दो बार से बीजेपी ही काबिज़ रही है.
मध्य प्रदेश के हिन्दुत्व का गढ़ होने और वहां आरएसएस का अधिक प्रभाव रहने की बात समझी जा सकती है, लेकिन 11 लोकसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ और 25 लोकसभा सीटों वाले राजस्थान में भी बीते दो बार से बीजेपी का ही बोलबाला रहा है.।
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