दुर्ग/(सुनील शर्मा) जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब दुर्ग में पूज्य गुरुदेव श्री शीतल राज जी महाराज के सानिध्य में आज पर्यूषण पर्व का प्रथम दिवस ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया जय आनंद मधुकर रतन भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए गुरुदेव श्री ने कहा जिस व्यक्ति के पास ज्ञान नहीं है वह व्यक्ति दुनिया का सबसे गरीब इंसान है धर्म ज्ञान और तप के बल पर हर कार्य संपादित हो सकते हैं
गुरुदेव श्री ने कहा तीर्थंकर परमात्मा ने चार तीर्थ की स्थापना कर भव्य जीवों को संसार के परिभ्रमण से बचने का उपाय बताया
पर्व दो प्रकार के होते हैं एक लौकिक पर्व और लोकोत्तर पर्व हिंदू समाज में लौकिक पर व हर्ष और उल्लास के वातावरण में हमेशा मनाया जाता है हो और जैन दर्शन में लोकोत्तर पर्व को मान्यता दी गई है हम लौकिक पर्व के पीछे लोकोत्तर पर्व को भूल जाते हैं
उन्होंने कहा साधक को अपने पाप की आलोचना प्रतिदिन करनी चाहिए अगर किसी कारणवश हम आलोचना प्रतिदिन ना कर सके तो 15 दिन में एक बार या माह में एक बार तो अवश्य ही करना चाहिए संसार की सभी जीवा योनियों से क्षमा के भाव रखते हुए समता भाव में जीवन जीना चाहिए प्रयुषण पर्व के दौरान हमें प्रति दिवस अंतागढ़ सूत्र का वचन एवं श्रवण पवित्र भावों के साथ करना चाहिए हम भी महापुरुषों की तरह वितरक प्रभु की वाणी को श्रवण कर अपने कर्मों का क्षय करने का प्रयास करना चाहिए हम अज्ञानता के कारण संसार के परिभ्रमण में भटक रहे हैं संसार में दुख का कारण सिर्फ और सिर्फ हमारा अज्ञान है जिसने अपनी आत्मा को पहचान लिया उसने दुनिया में सभी को पहचान लिया है अपने द्वारा किए गए कर्म के परिणाम जो भी हो अच्छे हो या बुरे हो उसे हमें स्वयं ही भुगतना पड़ता है ज्ञान के साथ-साथ क्रिया में आचरण का होना अत्यंत आवश्यक है गुरुदेव शीतल राज्य महाराज ने कहा गुप्ती का ज्ञान होता है शरीर के अंदर होने वाले कष्ट को क्षमता भाव से ग्रहण करते हुए हमें जीवन जीना चाहिए 24 तीर्थंकरों में से 23 तीर्थंकरों की कष्ट वेदना एक तरफ और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की कष्ट वेदना एक तरफ सबसे अधिक वेदना और संवेदनाओं में भगवान महावीर ने जीवन जिया है उनके द्वारा बताए गए मार्ग लाखों करोड़ों के जीवन को तारने वाला है
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