संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि रामोत्सव के विस्तारित आयोजन में 28 मार्च से 17 अप्रैल तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक कलाकारों की ओर से प्रस्तुतियां दी जाएंगी। टेंट सिटी की व्यवस्था समाप्त हो जाने के कारण ऐसे कलाकारों को ही आमन्त्रित किया जा रहा है जिन्हें कि कार्यक्रम की प्रस्तुति के बाद भोजन -आवास की सुविधा न उपलब्ध करानी पड़े। पहले दिन संत कबीर नगर की लोक गायिका स्वीटी सिंह गायन प्रस्तुत करेंगी। इसी तरह लखनऊ की संध्या प्रजापति लोक नृत्य की प्रस्तुति करेंगी और गोंडा की शिवानी शुक्ला भी लोक गीत प्रस्तुत करेंगी।
70 दिनों में छह देशों व 28 राज्यों के करीब चार कलाकार दे चुके हैं प्रस्तुति
रामोत्सव का आयोजन 14 जनवरी से 24 मार्च तक चला था। इन 70 दिनों में छह देशों सिंगापुर, थाईलैंड, मारीशस, श्रीलंका, इंडोनेशिया व लाओस के अलावा केरल से मणिपुर व पंजाब से गुजरात तक 28 राज्यों के करीब चार हजार से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी थी। यहां आने वाले कलाकारों में पद्मभूषण व पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित कलाकार भी शामिल थे।
इन कलाकारों ने लोक गायन लोक नृत्य, शास्त्रीय व उप शास्त्रीय गायन, शास्त्रीय नृत्य कथक-भरतनाट्यम के अतिरिक्त जादू, कठपुतली, रामलीला मंचन व बैले- नृत्य नाटिका के अलावा मुशायरा एवं साहित्यिक चर्चा कवि सम्मेलन व चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। यह सभी कार्यक्रम पांच बड़े मंचों तुलसी उद्यान, रामकथा पार्क, राम पैड़ी, भजन संध्या स्थल व निः शुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के अतिरिक्त 13 छोटे मंचों पर प्रस्तुत किए गये।।
इन कार्यक्रमों के आयोजन में ललित कला अकादमी ने विजुअल आर्ट के अन्तर्गत भगवान राम व रामायण पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी की व्यवस्था संभाली। वहीं संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति निदेशालय, अन्तर्राष्ट्रीय वैदिक संस्कृति शोध संस्थान व कबीर अकादमी शामिल रही। इसके साथ उत्तर प्रदेश लोक जनजाति एवं संस्कृति संस्थान की ओर से भारत सरकार के जोनल सांस्कृतिक केन्द्रों की ओर से भेजे गये कलाकारों की प्रस्तुतियों की व्यवस्था संभाली।
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