आयोध्या /( सुनील शर्मा) शताब्दियों की गुलामी के बाद मिली आजादी 2 साल की ही हुई थी. संविधान तो गर्भ में ही था. तभी 1949 में केरल का मूल निवासी एक आईएएस अफसर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले का डीएम (कलेक्टर) बनकर आता है. नई पोस्टिंग पर अपने कामकाज को समझ ही रहा होता है कि इस युवा अफसर को खुफिया जानकारी मिलती है कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद में कुछ होने वाला है. कुछ दिनों बाद खबर आती है कि उसी विवादित स्थल में भगवान राम की मूर्तियां प्रकट हुईं हैं.
अब तक इस अफसर को राम की ऐसी लगन लग चुकी होती है कि वरिष्ठ अफसरों की तो कौन कहे, वह तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत से भी भिड़ जाता है. उसे सस्पेंड कर दिया जाता है, लेकिन राम लला की मूर्ति पर वह आंच नहीं आने देता. दबाव बढ़ता है तो वो नौकरी छोड़कर परिवार सहित पूर्णकालिक रामभक्ति में लीन हो जाता है. फिर ऐसी भक्ति का प्रसाद जनता उस अफसर को सपत्नीक संसद भेजकर देती है.
केरल के अलपुज्झा के एक छोटे से गांव में 11 सितंबर 1907 को जन्मे थे कडनगलाथिल करुनाकरन नायर (केके नायर). स्कूली शिक्षा केरल में पूरी करने के बाद हायर स्टडीज के लिए पहले मद्रास यूनिवर्सिटी, उसके बाद आगरा यूनिवर्सिटी के बारासेनी कॉलेज, अलीगढ़ चले आते हैं. यहां से उनका दाखिला यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में हो जाता है. 21 साल की उम्र में वहीं से इंडियन सिविल सर्विसेस (ICS) के लिए चुने जाते हैं. उन्हें यूपी कैडर में पोस्टिंग मिलती है.।
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