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छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की शपथ ग्रहण कुंडली से जानें कैसी चलेगी इनकी नई सरकार

रायपुर /( सुनील शर्मा) विष्णु देव साय के जन्म के समय में चन्द्रमा वृषभ राशि में थे और आज इसे आप एक ज्योतिषीय संयोग कहें या उनके द्वारा चतुराई से चुना गया मुहूर्त, क्योंकि उनके शपथ ग्रहण के समय लग्न भी उनकी चंद्र राशि के समान वृषभ ही है। वृषभ एक स्थिर राशि का लग्न होने के चलते आज चन्द्रमा के मूल नक्षत्र जैसे अशुभ नक्षत्र में होने के प्रभाव में कुछ कमी आ जाती है और स्थिर लग्न में शपथ ग्रहण प्रदेश के नए मुख्यमंत्री को मज़बूती से कार्य करने में भी सहायक होगा ऐसा ज्योतिषीय योग बनता है। आइए जानते हैं उनकी शपथ ग्रहण कुंडली के बारे में विस्‍तार से।

    
एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ राज्य को आज पहला आदिवासी मुख्यमंत्री मिला जब बुधवार की शाम को 4 बजकर 3 मिनट पर विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ में सबसे पहले कांग्रेस के अजित जोगी 3 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद 2003 से 2018 तक लगातार 15 वर्ष तक भाजपा के रमन सिंह चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद पर रहे। पिछले पांच वर्षों तक कांग्रेस के ओबीसी समुदाय से आने वाले भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे जो कि इस बार के विधानसभा चुनावों में एक चौंकाने वाले नतीजे के बाद अपनी पार्टी का बहुमत खोकर अब विपक्ष में बैठेंगे। 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जन्मे विष्णु देव साय और उनके राजनी‍तिक भविष्‍य की संभावनाओं के बारे में जानते हैं विस्‍तार से।
विष्णु देव साय कृषि और उद्योगिक विकास में करेंगे यह बड़ा काम

शपथ ग्रहण के समय छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की वृषभ लग्न की शपथ ग्रहण कुंडली के दशम भाव में बैठे शनि उनको किसानों और मजदूरों के हित में कई बड़े निर्णय जल्द लेने में प्रेरित करेंगे। मेदिनी ज्योतिष में शनि को कृषि, उद्योगिक विकास, इस्पात , कलकारखानों , खदानों आदि का कारक ग्रह माना जाता है। धान की खेती और अपनी खनिज सम्पदा के लिए जाना जाने वाला छत्तीसगढ़ राज्य अभी औद्योगिक विकास में देश के अन्य राज्यों से कुछ पीछे है। किन्तु छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण कुंडली में दशम भाव में शनि षड्बल में 9.58 रूपा का बल लेकर एक विलक्षण स्थिति में 'शश-महापुरुष' योग बना रहे हैं जो कि मुख्यमंत्री को शनि के प्रमुख कार्यक्षेत्रों जैसे कृषि और उद्योग में बड़ी योजनाएं लागू करने में सहायता करेंगे। विपक्ष के सप्तम भाव में बैठे सूर्य और मंगल पर शनि की दसवीं दृष्टि विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कुछ नेताओं पर कानूनी कार्यवाही के बाद उसे सत्ता पक्ष के विरुद्ध अधिक आक्रामक बना सकती है। शपथ ग्रहण कुंडली में स्त्री कारक ग्रह शुक्र लग्नेश और षष्टेश हो कर छठे घर में बैठ कर लाभ भाव के स्वामी गुरु से समसप्तक योग बना रहे हैं। जिसके चलते महिलाओं के लिए बीजेपी की राज्य में बहुप्रचारित 'महतारी योजना' पर अधिक खर्च कुछ परेशानी का कारण बन सकता है।
केंद्र में पाप ग्रह खड़ी करेंगे यह मुश्किलें

विष्णु देव साय की शपथ ग्रहण कुंडली में केंद्र में किसी शुभ ग्रह का न होना एक बड़ी कमज़ोरी है। शपथ ग्रहण के समय चन्द्रमा धनु राशि में उनके जन्मकालीन चन्द्रमा से अष्टम भाव में हो कर भविष्य में होने वाले कुछ षडयंत्रों की ओर भी ज्योतिषीय संकेत दे रहा है। विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री बनाने के साथ बीजेपी ने अरुण साव और विजय शर्मा को उपमुख्यमंत्री पद का दायित्व सौंपा है। विष्णु देव साय की शपथ ग्रहण कुंडली में सहयोगियों के तीसरे घर के स्वामी चन्द्रमा का लग्न से अष्टम भाव (षड्यंत्र) में चले जाना अपनी ही पार्टी के सहयोगियों से परेशानी का योग है जिसके लिए उनको बेहद सतर्क रहना होगा। शपथ ग्रहण कुंडली में नवांश में लग्न में सूर्य और राहु का होना तथा दशम भाव में मंगल और शनि की धनु राशि में युति ढाई वर्ष के बाद उनके कार्यकाल के दूसरे हिस्से में उनको पार्टी के भीतर असंतोष से जूझने पर विवश कर सकती है।

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