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दिग्गज नहीं बचा पाए अपनी सीटः डिप्टी सीएम, पीसीसी चीफ सहित 8 कैबिनेट मंत्री बीजेपी की आंधी में उड़े, जानिए पूरी डिटेल

 रायपुर ( सुनील शर्मा)  छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों पर काउंटिंग पूरी हुई ।राज्य की जनता ने अपना जनादेश दे दिया हैं  भूपेंश  के भरोसे पर मोदी की गारंटी  भारी पडा।छत्तीसगढ़ विधानसभा 2023 के चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम सामने आए हैं। मोदी की गारंटी की आंधी ( सुनामी) ऐसी चली की वर्तमान के कई दिग्गज मंत्री अपनी सीट  तक नहीं बचा सके। प्रदेश के 12 में से 9 मंत्री अपने निकट प्रतिद्वंदी से बड़े अंतर से चुनाव हार गए।
 सबसे चौकाने वाला परिणाम अंबिकापुर से रहा। कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार माने जा रहे वर्तमान के उप मुख्यमंत्री और अंबिकापुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी टीएस सिंहदेव चुनाव हार गए हैं। वहीं साजा से रविन्द्र चौबे, कवर्धा से मोहम्मद अकबर, आरंग से शिवकुमार डहरिया, सीतापुर से अमरजीत भगत, नवागढ़ से गुरु रुद्र कुमार, दुर्ग  ग्रामींण् सीट से गृह मंत्री रह चुके ताम्रध्वज साहू , कोंडागांव से मोहन मरकाम और कोरबा से जय सिंह अग्रवाल , दुर्ग शहर सीट से राज्य वेयर हाउस निगम के अध्य्क्ष  अरुण वोरा  भी शामिल हैं। कांग्रेस के मुख्य मंत्री रहे चुके पाटन सीट से भूपेंश  बघेल, और  डोंडी लोहरा सीट से केबिनेट मंत्री रह चुके  ( महिला बाल विकास ) अनिला भेड़िया अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। 
  • उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव – अंबिकापुर विधानसभा सीट पर 2008 से कांग्रेस का दबदबा बरकरार रहा है, लेकिन इस बार यहां कांग्रेस का जादू नहीं चला। टीएस सिंहदेव चुनाव हार गए हैं। भाजपा ने यहां से राजेश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया था।
  • गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू- दुर्ग ग्रामीण विधानसभा सीट से ताम्रध्वज साहू को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था। दिग्गज नेता और ओबीसी समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के ललित चंद्राकर ने बड़े अंतर से हराया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की लाज एकमात्र सीट जीतकर ताम्रध्वज साहू ने बचाई थी।
  • संसदीय मंत्री रविंद्र चौबे – बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा कांग्रेस के कद्दावर नेता रविंद्र चौबे चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के हिन्दुत्व कार्ड और बिरनपुर हिंसा की वजह से रविंद्र चौबे को हार का सामना करना पड़ा। गैर राजनीतिक व्यक्ति भाजपा के ईश्वर साहू ने उन्हें हराया है।
  • वन मंत्री मोहम्मद अकबर- कबीरधाम जिले की कवर्धा सीट काफी चर्चित सीट है। भाजपा के हिन्दुत्व कार्ड के आगे इस बार अकबर चुनाव हार गए। झंडा विवाद में सामने आए नाम विजय शर्मा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था। विजय ने उन्हें बड़े अंतर से चुनाव हरा दिया है।
  • नगरीय निकाय मंत्री शिव कुमार डहरिया- रायपुर जिले की आरंग विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे शिवकुमार डहरिया इस बार चुनाव हार गए। भाजपा ने यहां गुरु खुशवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। खुशवंत सतनामी समाज के गुरु हैं, चूंकि शिव डहरिया भी इसी समाज से आते हैं।
  • राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल- कोरबा विधानसभा सीट से राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल चुनाव हार गए। यह अनाराक्षित सीट है। इस बार भाजपा ने यहां से लखन देवांगन को मौका दिया था। मोदी की गारंटी में जयसिंह चुनाव हार गए।
  • पीएचई मंत्री गुरु रुद्र कुमार – बेमेतरा जिले की नवागढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु रूद्र कुमार चुनाव हार गए। 2018 में उन्होंने अहिवारा सीट से जीत हासिल की थी। 2023 में उन्होंने सीट बदला और नवागढ़ से चुनाव लड़े। भाजपा प्रत्याशी दयालदास बघेल ने उन्हें बड़े अंतर से चुनाव हराया है।
  • खाद्य मंत्री अमरजीत भगत- सरगुजा संभाग की सीतापुर विधानसभा सीट से अमरजीत भगत चुनाव हार गए। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस बार अमरजीत भगत के खिलाफ भाजपा ने सेना के पूर्व जवान राम कुमार टोप्पो को उम्मीदवार बनाया था।
  • आदिम जाति कल्याण मंत्री मोहन मरकाम- कोंडागांव जिले की कोंडागांव सीट से चुनाव लड़ रहे मंत्री मोहन मरकाम भी चुनाव हार गए। उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने बड़े अंतर से पराजित किया है।
  • सांसद और पीसीसी चीफ दीपक बैज- बस्तर जिले की चित्रकोट विधानसभा से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चीफ और सांसद दीपक बैज भी चुनाव हार गए। भारतीय जनता पार्टी के विनायक गोयल ने उन्हें करारी शिकस्त दी है।
  •  राज्य वेयर हाउस निगम के अध्य्क्ष  केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अरुण वोरा  
  • राज्य वेयर हाउस निगम के अध्य्क्ष केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अरुण वोरा भी चुनाव  48697 मतों से हार चुके हैं। वे लगातार  7 चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें तीन बार विधायक भी रह चुके हैं  व चार चुनाव हार चुके हैं। जनता का जन आक्रोश भी उनके हार की बड़ी वजह  हैं। कुछ लोगों की माने तो सरल व्यक्तित्व के धनी माने जाते हैं। 

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