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छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के 1200 मनोनीत पार्षदों की सेवाएं समाप्त, कांग्रेस सरकार के समय हुई थी नियुक्तियां, अब क्या होगा?

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के 1200 मनोनीत पार्षदों की सेवाएं समाप्त, कांग्रेस सरकार के समय हुई थी नियुक्तियां, अब क्या होगा?
रायपुर /( सुनील शर्मा) छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के नगरीय निकायों के 1200 से अधिक एल्डरमैन की सेवाएं समाप्त कर दी है। इन सभी की नियुक्ति भूपेश बघेल सरकार के समय में हुई थी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विकास विभाग के सचिव डॉ. अय्याज एफ तंबोली ने आदेश जारी कर दिया है। नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षद की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म करने से एल्डरमैनों में निराशा है। सभी नियुक्तियां नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में हुई थी।

बता दें कि विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने निगम, मंडल, आयोग के बाद अब नगरीय निकाय में कार्रवाई की है। सभी मनोनीत पार्षदों का कार्यकाल खत्म कर दिया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। भूपेश सरकार के कार्यकाल में नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षद और दिव्यांग मनोनीत सदस्य के रूप में नियुक्ति हुई थी। ऐसी चर्चा है कि नगरीय निकाय चुनाव होने के बाद भाजपा सरकार नए सिरे से नियुक्तियां करेगी। मनोनीत पार्षदों के रूप में ज्यादातर राजनीतिक दल, सामाजिक कार्यकर्ताओं या फिर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को मौका देती है।

महापौर चुनने के नियम में फेरबदल के संकेत
भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही कई पुराने नियमों में संशोधन की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में महापौर चुनने की प्रक्रिया के नियमों में भी फेरबदल हो सकता है। कांग्रेस सरकार ने महापौर और अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष कर दिया था। इससे पहले महापौर और नपा अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष चुनने के लिए आम लोगों को मतदान करना होता था। सियासी गलियारों में इस बात चर्चा है कि फिर से पुराने नियम लागू हो सकते हैं, जिसमें जनता महापौर का चुनाव करेगी। नियमों में फेरबदल के संकेत से ही कांग्रेस के महापौर इससे बचने के उपाय ढूंढने लगे हैं।


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