बता दें कि विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने निगम, मंडल, आयोग के बाद अब नगरीय निकाय में कार्रवाई की है। सभी मनोनीत पार्षदों का कार्यकाल खत्म कर दिया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। भूपेश सरकार के कार्यकाल में नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षद और दिव्यांग मनोनीत सदस्य के रूप में नियुक्ति हुई थी। ऐसी चर्चा है कि नगरीय निकाय चुनाव होने के बाद भाजपा सरकार नए सिरे से नियुक्तियां करेगी। मनोनीत पार्षदों के रूप में ज्यादातर राजनीतिक दल, सामाजिक कार्यकर्ताओं या फिर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को मौका देती है।
महापौर चुनने के नियम में फेरबदल के संकेत
भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही कई पुराने नियमों में संशोधन की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में महापौर चुनने की प्रक्रिया के नियमों में भी फेरबदल हो सकता है। कांग्रेस सरकार ने महापौर और अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष कर दिया था। इससे पहले महापौर और नपा अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष चुनने के लिए आम लोगों को मतदान करना होता था। सियासी गलियारों में इस बात चर्चा है कि फिर से पुराने नियम लागू हो सकते हैं, जिसमें जनता महापौर का चुनाव करेगी। नियमों में फेरबदल के संकेत से ही कांग्रेस के महापौर इससे बचने के उपाय ढूंढने लगे हैं।
0 Comments