दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के दिन बनती हैं सूरन की सब्जी
दुर्ग /( सुनील शर्मा) दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के दिन सूरन की सब्जी बनती है,,,सूरन को जिमीकन्द (कहीं कहीं ओल) भी बोलते हैं,, आजकल तो मार्केट में हाईब्रीड सूरन आ गया है,, कभी कभी देशी वाला सूरन भी मिल जाता है। बता दे कि बचपन में ये सब्जी फूटी आँख भी नही सुहाती थी,, लेकिन चूँकि बनती ही यही थी तो इसे मजबूरी में खाना पड़ता था,,तब हम लोग सोचते थे कि मनुष्य कितना कंजूस हैं जो आज त्यौहार के दिन भी ये खुजली वाली सब्जी खिला रहे हैं,,, तब हमारे पूर्वज बोलते थे कि आज के दिन जो सूरन की सब्जी नहीं खायेगा । वह मनुष्य अपने अगले जन्म में छछुंदर का जन्म लेगा।
यही सोच कर लोग यह सब्जी अनवरत खाये जा रहे है कि छछुंदर न बन जाये जेसे जेसे मनुष्य बड़े हुए तब सूरन की उपयोगिता लोगों को समझ में आई। कृषि विभाग के अधिकारियो ने भी बताया कि यह
सब्जियो में सूरन ही एक ऐसी सब्जी है जिसमें फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है,, ऐसी मान्यता है और अब तो मेडिकल साइंस ने भी मान लिया है कि इस एक दिन यदि हम देशी सूरन की सब्जी खा ले तो स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पूरे साल फास्फोरस की कमी नही होगी,,। तब से यह परमपरा चली आ रही हैं। मनुष्य को आज तक नहीं पता कि ये परंपरा कब से चल रही है लेकिन सोचीए तो सही कि हमारे लोक मान्यताओं में भी वैज्ञानिकता छुपी हुई होती थी । पुराने बुजुर्गों ने जिन्होंने विज्ञान को परम्पराओं, रीतियों, रिवाजों, संस्कारों में भी बाँध दिया हैं। कुछ लोगों ने तो यह भी कहाँ कि मान्यता ही परम्पराओं, रीतियों, रिवाजों, संस्कारों को जन्म दिया हैं।
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