दोनों ही पार्टियों में अंदरुनी कलह शुरू, टिकट वितरण बना नाराज़गी का बड़ा कारण, कुछ नये चेहरे से नाराज, तो कुछ पुराने खाटी चेहरे से परेशान
( सुनील शर्मा) ✍ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों में अंदरूनी कलह का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव के टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई लोगों को टिकट से वंचित कर दिया गया है, जो उसे सबक सिखाने की धमकी दे रहे हैं। कई नेताओं ने तो नामांकन फार्म तक खरीद लिया है और कुछ 21 तारीख नामांकन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में टिकटों को लेकर मचे घमासान के मंडरा रहे ‘विद्रोह के तूफानी बादल’ कांग्रेस व भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।
उल्लेखनीय हैं कि छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव होना है। इसमें 7 नवंबर को 20 विस सीटों के लिए वोटिंग होगी तो वहीं शेष 70 सीटों पर 17 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। रिजल्ट 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। 20 अक्टूबर को नामांकन फार्म जमा करने का अंतिम दिन है। छत्तीसगढ़ के मुख्य राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा ने पहले चरण में होने वाले चुनाव के लिए सभी विस सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने अब तक 90 में से 83 और भाजपा ने 86 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
कांग्रेस पार्टी ने नवरात्र के पहले दिन 30 व दूसरी सूची में 53 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें मौजूदा 8 विधायकों के टिकट काटे थे। जिनमें पंडरिया विधानसभा से ममता चंद्राकर, खुज्जी से छन्नी साहू, दंतेवाड़ा से देवती कर्मा, अंतागढ़ से अनूपनाग, कांकेर से शिशुपाल सोरी, चित्रकोट से राजमन बेंजाम, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और नवागढ़ से गुरूदयाल बंजारे शामिल हैं। इन सीटों पर पहले चरण में चुनाव होना है। नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कुछ मौजूदा विधायकों ने पार्टी से विद्रोह करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इनमें अंतागढ़ से अनूप नाग, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और चित्रकोट से राजमन बेंजाम द्वारा नामांकन फार्म लेने की चर्चा है। अनूप नाग ने नामांकन फॉर्म भी भर दिया है।
दूसरी ओर बुधवार को 53 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की गई है। इनमें भी 10 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए हैं। इनमें धरसींवा से अनिता शर्मा, लैलूंगा से चक्रधर सिंह सिदार, बिलाईगढ़ से चंद्रदेव राय, रामानुजगंज से बृहस्पत सिंह, सामरी से चिंतामणी महाराज, पाली तानाखार से मोहित केरकेट्टा, मनेंद्रगढ़ से विनय जायसवाल, प्रतापपुर से प्रेमसाय टेकाम, जगदलपुर से रेखचंद जैन और रायपुर ग्रामीण से सत्यनारायण शर्मा शामिल हैं। हालांकि सत्यनारायण शर्मा पहले ही ऐलान कर चुके थे कि इस बार वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने अपने बेटे पंकज शर्मा के लिए टिकट मांगी थी। पार्टी ने उनकी बात मानी और पंकज को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में उनका टिकट कटना कहना गलत होगा।
अब दोनों ही पार्टियों में कुछ लोगों के निर्दलीय लड़ने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण के तहत मतदान होना है। इसलिए यहां नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। नामांकन फार्म की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कौन पार्टी से बगावत कर लड़ेगा या फिर पार्टी मनाने में कामयाब होगी। वहीं लगातार कांग्रेस व भाजपा पार्टी मे एक ही चेहरे को बार बार टिकट देना भी पराजय को निमंत्रण देना मान रहे हैं। वहीं भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में रहने वाले लोग (अपनी ही पार्टी को पराजित करने वाले लोग) निपटाओ शब्द का चलन बढ़ गया हैं। यह शब्द का चलन दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ताओं मे सुनने मिल रहा हैं। कांग्रेस पार्टी के लोग कह रहे हैं हमे तो भाजपा वाले लोग जीता रहे हैं। भाजपा वाले लोग कह रहे हैं कांग्रेस से नाराज लोग भाजपा को जीता रहे हैं । फ़िलहाल यह स्तिथि 3 दिसंबर को स्प्ष्ट हो जाएगा। दोनों ही पार्टी अपने अपने जीत का दम भर रहे हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि जो लोग बगियो को साधने में कामयाब होंगे। वे चुनाव में जीत जाएंगे। फ़िलहाल दोनों ही पार्टी अपने अपने मतदाताओ को साधने में लगे हैं। भाजपा व कांग्रेस में अंदरूनी कलह बढ़ रही हैं। वहीं बड़ी संख्या लोग कुछ तो टिकट वित्तरण से नाराज होकर अपने ही पार्टी में रहकर पार्टी को नुकसान पहुचाने में लगे हुए हैं।
कांग्रेस पार्टी ने नवरात्र के पहले दिन 30 व दूसरी सूची में 53 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें मौजूदा 8 विधायकों के टिकट काटे थे। जिनमें पंडरिया विधानसभा से ममता चंद्राकर, खुज्जी से छन्नी साहू, दंतेवाड़ा से देवती कर्मा, अंतागढ़ से अनूपनाग, कांकेर से शिशुपाल सोरी, चित्रकोट से राजमन बेंजाम, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और नवागढ़ से गुरूदयाल बंजारे शामिल हैं। इन सीटों पर पहले चरण में चुनाव होना है। नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में कुछ मौजूदा विधायकों ने पार्टी से विद्रोह करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इनमें अंतागढ़ से अनूप नाग, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल और चित्रकोट से राजमन बेंजाम द्वारा नामांकन फार्म लेने की चर्चा है। अनूप नाग ने नामांकन फॉर्म भी भर दिया है।
दूसरी ओर बुधवार को 53 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की गई है। इनमें भी 10 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए हैं। इनमें धरसींवा से अनिता शर्मा, लैलूंगा से चक्रधर सिंह सिदार, बिलाईगढ़ से चंद्रदेव राय, रामानुजगंज से बृहस्पत सिंह, सामरी से चिंतामणी महाराज, पाली तानाखार से मोहित केरकेट्टा, मनेंद्रगढ़ से विनय जायसवाल, प्रतापपुर से प्रेमसाय टेकाम, जगदलपुर से रेखचंद जैन और रायपुर ग्रामीण से सत्यनारायण शर्मा शामिल हैं। हालांकि सत्यनारायण शर्मा पहले ही ऐलान कर चुके थे कि इस बार वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने अपने बेटे पंकज शर्मा के लिए टिकट मांगी थी। पार्टी ने उनकी बात मानी और पंकज को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में उनका टिकट कटना कहना गलत होगा।
अब दोनों ही पार्टियों में कुछ लोगों के निर्दलीय लड़ने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण के तहत मतदान होना है। इसलिए यहां नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। नामांकन फार्म की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कौन पार्टी से बगावत कर लड़ेगा या फिर पार्टी मनाने में कामयाब होगी। वहीं लगातार कांग्रेस व भाजपा पार्टी मे एक ही चेहरे को बार बार टिकट देना भी पराजय को निमंत्रण देना मान रहे हैं। वहीं भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में रहने वाले लोग (अपनी ही पार्टी को पराजित करने वाले लोग) निपटाओ शब्द का चलन बढ़ गया हैं। यह शब्द का चलन दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ताओं मे सुनने मिल रहा हैं। कांग्रेस पार्टी के लोग कह रहे हैं हमे तो भाजपा वाले लोग जीता रहे हैं। भाजपा वाले लोग कह रहे हैं कांग्रेस से नाराज लोग भाजपा को जीता रहे हैं । फ़िलहाल यह स्तिथि 3 दिसंबर को स्प्ष्ट हो जाएगा। दोनों ही पार्टी अपने अपने जीत का दम भर रहे हैं। कुछ लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि जो लोग बगियो को साधने में कामयाब होंगे। वे चुनाव में जीत जाएंगे। फ़िलहाल दोनों ही पार्टी अपने अपने मतदाताओ को साधने में लगे हैं। भाजपा व कांग्रेस में अंदरूनी कलह बढ़ रही हैं। वहीं बड़ी संख्या लोग कुछ तो टिकट वित्तरण से नाराज होकर अपने ही पार्टी में रहकर पार्टी को नुकसान पहुचाने में लगे हुए हैं।
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