राजनीतिक सूत्र कहते है, अमित जोगी कई सालो से कांग्रेस में आना चाहते हैं। इसके लिए सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं तक लॉबिंग कर चुके हैं, मगर मुख्य बात यह है कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कांग्रेस नेता एवम सी एम बघेल यह नहीं चाहते कि अमित जोगी कांग्रेस में वापस आए। कौन जाने अमित जोगी शायद इसी बात का बदला लेने चुनाव में उतर रहे हों। अमित जोगी पाटन की चुनाव में बड़ा असर डाल सके इसकी संभावना कम है, फिर भी उनके लड़ने से भाजपा को कुछ फायदा हो सकता है। इसके बाद यह भी सच है कि अमित जोगी खुद के लिए कांग्रेस में आने के लगभग सारे द्वार बंद कर चुके होंगे अमित जोगी भी यह बात भली-भांति समझते हैं। इसके बावजूद यदि वे चुनाव लड़ते हैं; तो कुछ लोग कहते हैं कि भाजपा के कहने पर वह ऐसा कर रहे हैं।
पाटन सीट से आम आदमी पार्टी के युवा उम्मीदवार अमित हिरवानी भी किसानों के लिए समर्पित नया उभरता छत्तीसगढ़िया चेहरा हैं। और भी कुछ स्थानीय नेता पाटन से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरे हैं। बहरहाल, बात अमित जोगी के पाटन से चुनाव लड़ने की हो रही है। संभव है वह समय रहते नामांकन वापस ले लें। दूसरी संभावना है, चुनाव लड़ें लेकिन दोनों स्थितियों में उन्हें ज्यादा राजनीतिक लाभ होने की उम्मीद नहीं है।
पाटन सीट से आम आदमी पार्टी के युवा उम्मीदवार अमित हिरवानी भी किसानों के लिए समर्पित नया उभरता छत्तीसगढ़िया चेहरा हैं। और भी कुछ स्थानीय नेता पाटन से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरे हैं। बहरहाल, बात अमित जोगी के पाटन से चुनाव लड़ने की हो रही है। संभव है वह समय रहते नामांकन वापस ले लें। दूसरी संभावना है, चुनाव लड़ें लेकिन दोनों स्थितियों में उन्हें ज्यादा राजनीतिक लाभ होने की उम्मीद नहीं है।
राजनितिक सूत्र बताते हैं कि यदि भाजपा प्रथम व दूसरे चरण के मतदान के बाद भी यदि 38 से 40 सीट भी जीत जाय तो समीकरण के हिसाब से छत्रीय पार्टी के मदद से या फिर कांग्रेस के सत्ता चाहने वालों की मदद से एम पी, महारास्ट्र में जैसे सरकार बनाए हैं ठीक उसी तरह यहाँ भी सरकार बनाने की तैयारी चल रही हैं। इस खेल में कांग्रेस के सी एम का पद चाहने वाले कद्दवार नेता की भी मदद ले सकते हैं। पाटन से यदि भाजपा चुनाव जीत जाय तो अमित जोगी को भी राज्य सभा में में भेजा जा सकता हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा रहा हैं कि सी एम बघेल को निपटाने की तैयारी चल रही हैं। भाजपा इस समय नये चेहरे पर दाव लगाया हैं। कहा तक समीकरण फिट बैठ जाय इस गणित में हैं। कुल मिलाकर खेल सत्ता हथियाने का हैं मतदान के बाद परिणाम आने के बाद ही 3 दिसम्बर को तय होगा।
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