तीन साल पहले पांच अगस्त, 2020 को जब राम मंदिर का शिलान्यास हुआ था, तब काफी विवाद हुआ था। वाराणसी के संतों और ज्योतिषियों ने सवाल खड़े कर दिए थे। उनका कहना था कि शिलान्यास का मुहूर्त अशुभ है। इसको ध्यान में रखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर विशेष ध्यान रखा है।।
हाइलाइट्स
- अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी
- पीएम नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का निमंत्रण स्वीकारा
- पांच अगस्त, 2020 को शिलान्यास तारीख को लेकर विवाद हुआ था।
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, अयोध्या ( सुनील शर्मा) : जिस दिन का करोड़ों देशवासियों को इंतजार था, वह नजदीक आ गया है। 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला के श्री विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या आएंगे। दोपहर 12.30 बजे प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने को अपने लिए सौभाग्य की बात बताया। इस मौके पर देश के 4000 संत-महात्मा और समाज के 2500 प्रतिष्ठित महानुभाव उपस्थित रहेंगे। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी का दिन ही क्यों चुना गया है? तीन साल पहले पांच अगस्त, 2020 को जब राम मंदिर का शिलान्यास किया गया था, तब मुहूर्त को लेकर सवाल क्यों उठे थे? आइए इन सवालों के जवाब आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल मकर संक्रांति के दौरान 16 जनवरी से 24 जनवरी 2024 तक की तिथियां शुभ मुहूर्त मानी गई हैं। मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के मुताबिक, पहले 24 जनवरी की तारीख प्राण- प्रतिष्ठा के लिए चुनी गई थी। इस बीच, मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने काशी और अन्य मठों-मंदिरों के विद्वान-आचार्यों से संपर्क कर सबसे शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी हासिल की। स्वामी गिरी धार्मिक अनुष्ठान आदि कार्यक्रमों के आयोजनों के लिए बनी हाई पावर कमिटी के अध्यक्ष भी हैं। बताया गया कि प्रभु श्रीराम का जन्म अभिजीत योग में हुआ था। अन्य तिथियों में यह योग क्षणिक समय के लिए बन रहा था जबकि 22 जनवरी को यह अभिजीत योग लंबे समय तक का है। ऐसे में तय हुआ कि यह तिथि ही सबसे उपयुक्त रहेगी। कामेश्वर चौपाल ने बताया कि स्वामी गोविंद देव गिरी के निर्देशन में विद्वान आचार्य से 22 जनवरी को प्रभु रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा के सारे अनुष्ठान करवाए जाएंगे। पीएम नरेंद्र मोदी इसके मुख्य यजमान बनेंगे।
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