गणेश चतुर्थी उत्सव के दस दिन पूरे होने पर गणेश विसर्जन किया गया। शहर में इस मौके पर शोभायात्रा का आयोजन किया गया। सभी भक्त मूर्ति को पानी में विसर्जित करके अगले वर्ष फिर भगवान गणेश के वापस आने की आशा की।
दुर्ग / ( सुनील शर्मा) आज अनंत चतुर्दशी के पर्व पर गणपति की विदाई होगी. दुर्ग शहर समेत पूरे प्रदेश में विसर्जन की जोरदार तैयारी की गई है. शिव नाथ नदी में इस बार सहित तलाब सरोवर अनेक जगहों पर लोग गणपति का विसर्जन कर सकेंगे. घर से लाए गए बप्पा के लिए शिव नाथ नदी में विसर्जन की विशेष व्यवस्था की गई हैं।
गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में आयोजित दस दिवसीय गणेश महोत्सव का गुरुवार को गणेश विसर्जन के साथ समापन हुआ। शहर के इंदिरा मार्केट सहित अनेक स्थानों में स्थापित ऊंची प्रतिमा का विजर्सन शिवनाथ नदी में हुआ। गणपति पंडाल से सुबह से देर रात तक गणपति प्रतिमा की बाजे गाजे, के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जो कि होटल, मान चौक,इंदिरा मार्केट स्टेशन स्टेशन रोड पटेल चौक से होते हुए शिवनाथ नदी तट की ओर बढ़ी। श्री लक्ष्मी नारायाण मंदिर, स्टे शन रोड से भी शोभायात्रा निकली गई। शिव नाथ नदी में भी मूर्ति विसर्जन के लिए गणपति बप्पा के भक्त पहुंचे। वहीं, लुचकी ता ला ब खाम ता ला ब स्थानों पर स्थापित बप्पा की प्रतिमाओं का भी को विसर्जन किया गया।
इससे पहले बुधवार को गणपति पंडाल में समिति के की मौजूदगी में पूर्णाहुति डाली गई। बाद दोपहर गणेश पूजन, पुराण कथा में बड़ी संख्या में भक्तजन पहुंचे। रात में भजन संध्या में भगवान गणेश के भजन गाए गए। कलाकारों ने हिंदी भजनों से श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में रंगा। गणेश महोत्सव में अनेक धार्मिक आयोजन हुए। भजन संध्या में भक्तों ने भगवान की स्तुति की।
, शहर में गुरुवार को शोभायात्रा निकाली गई। इससे पहले बुधवार को कार्यक्रम स्थल पर भंडारे का भी आयोजन किया गया। अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन का दिन माना जाता है क्योंकि यह दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी के बाद दस दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है, जिसमें भगवान गणेश की मूर्ति पूजन की जाती है। इसके बाद गणेश मूर्ति को विसर्जित किया जाता है।
0 Comments