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23 वर्षो बाद भी छत्तीसगढ़ शोषण मुक्त राज्य नहीं बन सका,- सर्व समाज

  राज्य बन तो गया, शोषण मुक्त नहीं, 
लंगुर सोनी ने किया, समाज को आगे  आने की अपील
दुर्ग /  र्अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य का सबसे अधिक राजस्व देनेवाला छत्तीसगढ़ आजादी के बाद भी उपेक्षा का शिकार बना रहा इसलिए पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की मांग समय-समय पर उठती रही लम्बे संघर्ष के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ राज्य अपने अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ राज्य बन तो गया पर शोषणमुक्त छत्तीसगढ़ राज्य अभी तक नही बन सका, शोषणयुक्त छत्तीसगढ़ राज्य को शोषण मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने के लिए ही 24 सितंबर 2023 को गोड महासभा दुर्ग के सभागार में छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के द्वारा एक दिवसीय चिंतन संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सामाजिक मैत्रिय के संबंध में चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ीया सर्व समाज महासंघ के मीडिया प्रभारी ध्रुव कुमार लंगूर सोनी ने बताया की दुर्ग संभाग स्तरीय सामाजिक मैत्री संगोष्ठी में दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम, बेमेतरा, बालोद, जगदलपुर व बस्तर के सुदूर जंगलों से भी विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं समाजसेवी लोगों की उपस्थिति रही है। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम एवं अध्यक्षता तिलक राम देवांगन पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री, विशेष अतिथि उत्तर प्रदेश से अजय साहू, बी. एस. रावटे कार्यकारी अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज छ.ग. आमंत्रित थे।
कार्यक्रम के संयोजक भगतराम सोनी ने अपने उद्घाटन भाषण में सामाजिक मैत्री संगोष्ठी की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ मजबूर  कैसे हो गया जबकि छत्तीसगढ़ में मिनरलस की कोई कमी नहीं है पिछले 23 वर्षों से छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सरकार रही है पर अमीर धरती पर गरीब छत्तीसगढ़िया सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं राजनीति के दृष्टि में आज भी पिछड़ा है, उपरोक्त समस्याओं का निदान कैसे हो सकेगा इसी पर विचार विमर्श भी किया गया। 
पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने अपने  उद्बोधन में कहा कि सामाजिक भावना को जानने व समझने के लिए ऐसे आयोजन लगातार होते रहना चाहिए अपने 60 वर्षो राजनीतिक व सामाजिक कार्यों के संबंध में अवलोकन करते हुए कि वर्तमान छत्तीसगढ़ियों की दुर्दशा के लिए नौकर शाह अधिक जिम्मेदार हैं, और राजनेता तो अपने अपने पार्टियों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करते है, वे अपने अपने समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते है। इसलिए हमें सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रति संवेदनशील व्यक्ति को राजनीति में भेजना होगा, कृषि के क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधन, संपदा से भरपूर होने के बावजूद नौकरशाहों के वजह से छत्तीसगढ़ बदहाल है विधायकों का काम केवल स्थानांतरण को रोकने और स्थानांतरण कराने के सिवा कुछ नहीं रहा है राज्य के मंत्री कभी केन्द्रीय मंत्रालय नहीं जाते ताकि उनके विभाग के बारे में सही योजना को जान सके उन्हें अपने विभाग का मंत्री होने के कारण केन्द्रीय मंत्रालय जाना चाहिए. । 
जब तक विधायको का रिव्यू करने का अधिकार समाज के पास नहीं आता तब तक समस्याओं का समाधान असंभव है।
इस मौके पर बी. एस. रावटे कार्यकारी अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज, मन्नूलाल परगनिहों संरक्षक सर्व कुर्मी समाज, बस्तर पिछड़ा वर्ग के जनजागरण के जिला अध्यक्ष तरूण धाकड़, पालन साहू बस्तर, बसंत सिन्हा कलार समाज के प्रदेश राजनीतिक सलाहकार, किसान नेता लीलाराम साहू धमतरी, राधेश्याम साहू अध्यक्ष पिछड़ावर्ग कल्याण संघ डौडी लोहारा, गिरधर मढ़रिया राष्ट्रीय अध्यक्ष पिछड़ा समाज पार्टी, कुमार गायकवाड़, देवरबीजा, वहलराम वर्मा बेमेतरा, राजेन्द्र पटेल अध्यक्ष लोधी समाज साजा, केशव साहू, श्रीमती कौशिल्या नारंग प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य महिला पिंग सतनामी समाज, ज्वाला मरकाम प्रदेश अध्यक्ष देवार समाज, आनंद रामटेके प्रदेश अध्यक्ष समता सैनिक दल, लवकुमार रामटेके अधिवक्ता बिलासपुर अल्पसंख्यक समुदाय से जावेद खान, जहीर खान भिलाई, भूपेन्द्र नागवंशी, डी. एस. सिन्हा टेडेसरा, पूर्णिमा साहू लता पटेल, लंगूर सोनी उत्कल समाज, दीपक महोबिया छुरिया आदि ने अपने  अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी का संचालन भोजराम डडसेना पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कलार समाज छ.ग. एवं हेमंत कोसरिया ने किया ।


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