हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहा जाता है। इस बार पितृ पक्ष 7 सितंबर रविवार से आरंभ होकर 21 सितंबर (सर्वपितृ अमावस्या) तक रहेगा। दशकों बाद पहले ही दिन पूर्णिमा श्राद्ध और खग्रास चंद्रग्रहण दोनों पड़ रहे हैं। समाप्ति पर सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में नहीं दिखेगा। ऐसे भारतीय परिवार जो सूर्यग्रहण ग्रस्त देश में रह रहे हैं उनको भी पितृ अमावस्या पर सूतक का ध्यान रखना होगा।

पितृपक्ष विशेष

दुर्ग/(सुनील शर्मा) पितरों को जलतर्पण करने वाले जातक सुबह स्नान कर तिल, अक्षत, फूल और कुश लेकर सूर्य के सामने पितरों को जल देंगे। पितृपक्ष में पितरों की मृत्यु तिथि को श्राद्ध व तर्पण करने से पितरों की आत्मा को असीम शांति मिलती है। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के दिन अगस्त्य ऋषि को तर्पण देकर उनसे आशिर्वाद प्राप्त करने का विधान है। माना जाता है कि अगस्त ऋषि का जुड़ाव पितृ लोक से है।

प्रतिदिन करना चाहिए तर्पण : पं. राजनाथ झा बताते हैं कि भारतीय सनातन परंपरा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को तर्पण और संध्या पूजन प्रतिदिन करना चाहिए। पितृपक्ष में 15 दिनों तक पितरों का तार्वण श्राद्ध करना चाहिए। तर्पण करने के लिए शंख में कास पुष्प (उजला फूल), जल, फल, आदि l

श्राद्ध तिथियों का क्रम

7 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध (सूतक पूर्व)

8 सितंबर-प्रतिपदा

9 सितंबर- द्वितीया

10 सितंबर तृतीया

11 सितंबर- चतुर्थी व पंचमी

12 सितंबर- षष्ठी

13 सितंबर- सप्तमी

14 सितंबर अष्टमी

15 सितंबर- नवमी

16 सितंबर- दशमी

17 सितंबर- एकादशी

18 सितंबर- द्वादशी

19 सितंबर त्रयोदशी

20 सितंबर- चतुर्दशी

21 सितंबर-सर्वपितृ अमावस्या।

लेकर सूर्यदेव को समक्ष तर्पण कर पितरों को तृप्त करने की कामना करनी चाहिए। गोपाल मन्दिर दुर्ग के आचार्य राजेश मणि शर्मा का मानना हैं कि

सूतक से पहले होगा श्राद्ध तर्पण 7 सितंबर की दोपहर 12:57 बजे तक कर लेना चाहिए ल 12.57 के बाद चंद्र ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा। इसलिए पूर्णिमा श्राद्ध और तर्पण दोपहर 12:57 से पहले ही कर लेना आवश्यक है। रात 9:57 बजे ग्रहण लगेगा, जिसका मध्यकाल 11:42 पर और मोक्ष रात 1:27 बजे होगा। ग्रहण अवधि लगभग साढ़े तीन घंटे की रहेगी और यह पूरे भारत सहित कई अन्य देशों में भी दिखाई देगा।

पितृपक्ष मे अधभूत  सन्योग दशकों बाद दो ग्रहण... 

दशकों बाद आद्ध पक्ष में दो ग्रहण हैं। शुरुआत में चंद्रग्रहण और समापन पर सूर्यग्रहण। pi भारत में चंद्रग्रहण का पूरा असर होगा, लेकिन सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। ऐसे में जो परिवार उन देशों में हैं जहां सूर्यग्रहण होगा, उन्हें सूतक से पहले श्राद्ध करना होगा।

जिस तिथि को पितरों की मृत्यु हुई हो उस तिथि को तर्पण करने पर पितरों को विशेष संतुष्टि मिलती है।